क्या आपको पता है मृत्यु के बाद फिर से जीवित होने के बारे में विज्ञानिकोका क्या कहेना हे…

क्या आपको पता है मृत्यु के बाद फिर से जीवित होने के बारे में विज्ञानिकोका क्या कहेना हे…

आपको बता दें कि मानव शरीर एक जैविक प्रक्रिया पर आधारित है। इससे पहले कि हम जानें कि हमारा शरीर कैसे काम करता है हमें यह समझने की जरूरत है कि यह कैसे काम करता है। हमारी कोशिकाओं के अंदर कई तरह की रासायनिक प्रतिक्रियाएं होती हैं। इन प्रतिक्रियाओं में एटीपी नामक एक ऊर्जा बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर की कोशिकाएं इस एटीपी की ऊर्जा का उपयोग अपने विकास प्रजनन और मरम्मत के लिए करती हैं।

हालांकि जब एन्ट्रापी के कारण कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं तो शरीर कमजोर होने लगता है। इससे हमारी शारीरिक गतिविधियां बंद हो जाती हैं। ऐसे में व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस आधार पर देखा जाए तो हमारी मृत्यु तब होती है जब शरीर के अंदर की कोशिकाएं कमजोर हो जाती हैं तब होता है। कोशिकाओं के कमजोर होने से शरीर की जटिल प्रक्रियाएं भी रुक जाती हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इंसान को मौत के बाद भी जिंदा किया जा सकता है। हालाँकि इसका उत्तर हाँ या ना में नहीं हो सकता है। क्योंकि विज्ञान भी संभावनाओं की खोज पर चलता है। अभी तक हमारी वैज्ञानिक खोजों में ऐसी कोई विधि नहीं खोजी गई है जो शरीर की कोशिकाओं को पुन: उत्पन्न कर किसी व्यक्ति को फिर से जीवित कर सके। यह अनुमान लगाया जा सकता है कि भविष्य में हम कुछ ऐसा खोज सकते हैं जो एक स्थिर शरीर को पुन: उत्पन्न कर सके।

बहुत से लोग अपने शरीर को क्रायोजेनिक टैंकरों में इस उम्मीद में जमा कर रहे हैं कि वे भविष्य में किसी समय फिर से जीवित हो सकते हैं। ये क्रायोजेनिक टैंकर किसी व्यक्ति के शरीर के अंदर की कोशिकाओं को फ्रीज कर देते हैं। भविष्य में यदि कोई ऐसा नया आविष्कार किया जाए जो नैनोबॉट्स की मदद से उनकी कोशिकाओं की मरम्मत कर सके तो शायद भविष्य में उन्हें फिर से बनाया जा सके अब यहां दो विचार टकराते हैं।

अगर हम जीवन के बारे में विज्ञान की इस अवधारणा को देखें तो चेतना और अस्तित्व जैसी कोई चीज नहीं है। हम केवल एक जटिल भौतिक संविधान के माध्यम से जीते हैं। वहीं दूसरी ओर मनीषियों और धर्म के अनुसार व्यक्ति के अस्तित्व में चेतना का महत्वपूर्ण योगदान है। अब सच क्या है? यह हम अभी तक नहीं जानते हैं। विज्ञान और रहस्यवादी इसे अपने-अपने तरीके से परिभाषित और खोज रहे हैं।

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